विज्ञापन आ रहा है चाकलेट का लडकी अपने बाप को चाकलेट खिला के एक बार फिर टहलने भेज देती है और फिर एक लडके के साथ ....
विराट कोहली लडकी पटाने के तरीके सीखाता है !!
परफ्यूम लगाया और कईं लडकियाँ तन मन से पीछे लग जाती है !
हर किसी में लडकी को ही मुददा पर क्यूँ ?
क्या यही हैं हमारी भारतीय नारी ? क्या भारतीय नारी इतनी कमजोर है कि परफ्यूम की खुशबु से अपनी इज्जत गँवा दे..........
दिखाते ये चोकलेट खाओ प्यार हो जायेगा, जरा सोचो जब ये चोकलेट भारत में नही थी तब क्या भारतीय प्यार नही करते थे क्या ??
perfume नही था तो क्या हमारे पूर्वज से बदबू आती थी ??
क्या सीखते इन सब से हम जरा सोचिये ....
जब हमे कोई एतराज नही है तो ये तो दिखायेंगे ही ना ,,,,
इन सब का विरोध करे और इन से दूर रहे....
समझदारी से काम लीजिये .....
.
- कोलगेट नही था तो क्या भारतमेंपति पत्नी साथ नही सोते थे ?
- चाय नहीं थी तो क्या सब सुस्त और आलसी थे सुबह खडे नही हो पाते थे ?
- क्रिकेट नही था तो क्या भारतीय खेलते ही नही थे ?
- वैलेनटाइन नही था तो क्या भारतीय प्रेम नही करते थे ?
- फेयर n लवली नही थी तो क्या सब भारतीय नारी काली थी ?
- स्कर्ट नही थी तो क्या भारत में लडकियां पढती नही थी ?
- अमूल माचो नही था तो क्या भारतीय नंगे रहते थे ?
- डिस्को नही था तो क्या भारत में संगीत नही था ?
- ओह माई गोड शब्द नही था तो क्या भारतीय भगवान नही मानते थे ?
- लाइफबाय, लक्स नहीं था तो भारतीय गले-सडे रहते थे ?
- पैंटीन नही था तो क्या सब गंजे हो जाते थे ?
- अंग्रेजी नही थी तो क्या भारत में कोई ज्ञानी नही था ?
हर चीज़ में नारी का देह क्यों दिखाया जाता है भोग की वास्तु बनाकर...?? ऐसी घटनाओ में बहुत हद तक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया और बॉलीवुड का भी हाथ है, नैतिक पतन किया जा रहा बच्चों का मात्र पांच-छ: वर्ष की उम्र से...!!youtube देखें
विराट कोहली लडकी पटाने के तरीके सीखाता है !!
परफ्यूम लगाया और कईं लडकियाँ तन मन से पीछे लग जाती है !
हर किसी में लडकी को ही मुददा पर क्यूँ ?
क्या यही हैं हमारी भारतीय नारी ? क्या भारतीय नारी इतनी कमजोर है कि परफ्यूम की खुशबु से अपनी इज्जत गँवा दे..........
दिखाते ये चोकलेट खाओ प्यार हो जायेगा, जरा सोचो जब ये चोकलेट भारत में नही थी तब क्या भारतीय प्यार नही करते थे क्या ??
perfume नही था तो क्या हमारे पूर्वज से बदबू आती थी ??
क्या सीखते इन सब से हम जरा सोचिये ....
जब हमे कोई एतराज नही है तो ये तो दिखायेंगे ही ना ,,,,
इन सब का विरोध करे और इन से दूर रहे....
समझदारी से काम लीजिये .....
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- कोलगेट नही था तो क्या भारतमेंपति पत्नी साथ नही सोते थे ?
- चाय नहीं थी तो क्या सब सुस्त और आलसी थे सुबह खडे नही हो पाते थे ?
- क्रिकेट नही था तो क्या भारतीय खेलते ही नही थे ?
- वैलेनटाइन नही था तो क्या भारतीय प्रेम नही करते थे ?
- फेयर n लवली नही थी तो क्या सब भारतीय नारी काली थी ?
- स्कर्ट नही थी तो क्या भारत में लडकियां पढती नही थी ?
- अमूल माचो नही था तो क्या भारतीय नंगे रहते थे ?
- डिस्को नही था तो क्या भारत में संगीत नही था ?
- ओह माई गोड शब्द नही था तो क्या भारतीय भगवान नही मानते थे ?
- लाइफबाय, लक्स नहीं था तो भारतीय गले-सडे रहते थे ?
- पैंटीन नही था तो क्या सब गंजे हो जाते थे ?
- अंग्रेजी नही थी तो क्या भारत में कोई ज्ञानी नही था ?
हर चीज़ में नारी का देह क्यों दिखाया जाता है भोग की वास्तु बनाकर...?? ऐसी घटनाओ में बहुत हद तक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया और बॉलीवुड का भी हाथ है, नैतिक पतन किया जा रहा बच्चों का मात्र पांच-छ: वर्ष की उम्र से...!!youtube देखें
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