मारे
संविधान की एक धारा 49-O में एक प्रावधान है जिसके अनुसार किसी भी चुनाव
में मतदाता पोलिंग बूथ पर जाये, अपनी पहचान और मतदाता क्रमांक स...ाबित
करे, अपनी उंगली पर स्याही लगवाये, और फ़िर चुनाव अधिकारी से यह कहे कि मैं
किसी को वोट नहीं करना चाहता। सवाल उठता है कि हमें ऐसा क्यों करना
चाहिये? मान लीजिये कि आपके वार्ड चुनावों में लगभग सारे प्रत्याशी या तो
गुंडे-बदमाश हैं (90% तो होते ही हैं), या फ़िर कोई निकम्मा उम्मीदवार पुनः
मैदान में है और आप चाहते हैंकि सभी तो नालायक हैं, मैं क्यों वोट दूँ? उस
वक्त यह धारा काम आयेगी… मान लीजिये कि आपके वार्ड से कोई प्रत्याशी 123
वोटों से जीतता है, लेकिन यदि उसी वार्ड में 124 वोट “मुझे किसी को वोट
नहीं देना” वाली धारा 49-O के निकलते हैं तो न सिर्फ़ उस प्रत्याशी का
चुनाव रद्द हो जायेगा, बल्कि जब पुनः चुनाव होंगे उस वक्त पिछले सारे
प्रत्याशियों को चुनाव में भाग लेने का मौका नहीं मिलेगा, इस प्रकार
अपने-आप सभी उम्मीदवार खारिज हो जायेंगे।
यह धारा “Conduct of Election
Rules” सन् 1961 में उल्लिखित है। इस धारा को हमारे नेताओं नेजानबूझकर
प्रचारित नहीं किया, लेकिन आश्चर्यजनक यह भी है कि चुनाव आयोग और शेषन जैसे
अधिकारियों ने भी जनता को इस बारे में जागरूक करने का प्रयास नहीं किया।
पड़ताल करने पर पता चला कि इस धारा के उपयोग और इलेक्ट्रानिक मशीनों में
“निगेटिव” (इनमें से कोई नहीं) वाला बटन लगाने सम्बन्धी याचिका उच्चतम
न्यायालय में लम्बित है, और उस पर निर्णय आना बाकी है।
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