Monday, 22 April 2013

बुरी आदतों की लत

Posted by Tricksbee  |  at  05:09 No comments

मानव जीवन के लिए यह बहुत ही आम बात है, ‘हमारा दिमाग अच्छाइयों की जगह बुराइयों की ओर जल्दी आकर्षित होता है’।

हममें से बहुत से लोग अपनी अच्छाइयों और बुराइयों को बहुत अच्छी तरह से जानते हैं। लेकिन बहुत कम लोग ही बुराइयों का मुकाबला कर पाते हैं। ऐसी आदतों की सूची बहुत लम्बी है, सामान्यत: कुछ 5 ऐसी आदतें हैं जो आमतौर पर बहुत से लोगों में पायी जाती हैं।

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इन बुरी आदतों का समाधान बहुत ही आसान है। ऐसे ही कुछ खास 5 आदतें हैं :

धूम्रपान :

युवाओं में सबसे आम आदत है ‘धूम्रपान’।  धूम्रपान की शुरूवात अकसर कालेज में दोस्तो के साथ होती है और फिर यह हमारी आदत बन जाती है।  तनाव की स्थिति में आपको धूम्रपान से कुछ देर के लिए आराम मिल सकता है।  ऐसा इसलिए होता है क्योंआकि धूम्रपान करने के 10 मिनट बाद हमारा दिमाग डोपामीन नामक रासायन बनाता है, जो एक न्यूरोट्रांस्मीटर की तरह काम करता है और इसी रासायन के कारण हम आनंदित होते हैं।

लेकिन शायद हममें से बहुत लोग नहीं जानते कि हफ्ते में सिर्फ दो से तीन बार भी इस प्रकार का आनन्दय उठाना हमारे लिए घातक हो सकता है। तम्बाकू की थोड़ी सी मात्रा भी स्वाआस्य्े   के लिए हानिकारक होती है। सिर्फ एक सिग्रेट आपकी रक्त कोशिकाओं की आंतरिक दीवार को क्षति पहुंचा सकती है। इस क्षति के कारण हृदय से सम्ब न्धीं बीमारियां और रक्त् के थक्के  जमने जैसी समस्या एं भी आ सकती हैं।

धूम्रपान जैसी आदत से आज ही छुटकारा पाने की कोशिश शुरू कर दें।
टी वी और स्नैक्स का मज़ा

टी वी देखते हुए स्नैक्स लेने का मज़ा ही कुछ और है। लेकिन आपकी यह आदत आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छी  नहीं। हालांकि हफ्ते में एक या दो बार आप ऐसा कर सकते हैं, लेकिन हर रात स्नैक्‍स लेना एक बुरी आदत हो सकती है। सोफे पर बैठकर ऐसे आहार का मज़ा लेना आपके शरीर और दिमाग को बर्बाद कर सकता है।

ऐसा पाया गया है कि वो लोग जो टी.वी से चिपके रहते हैं, वो 71 प्रतिशत तक अधिक आहार ग्रहण कर लेते हैं और यह कोई आश्चर्य की बात नहीं कि अगर आप हफ्ते में 19 घंटे टी वी देखते हैं तो आपमें ओवरवेट होने की सम्भानवना 97 प्रतिशत बढ़ जाती है शोधों से ऐसा भी पता चला है कि अगर आप 80 मिनट से ज्यादा टी वी देखते हैं तो आपमें एलज़ाइमर बीमारी के होने की सम्भावना 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। अगर आपके पास डिजिटल विडियो है तो इसका इस्तेमाल करें और शोज़ को रिकार्ड करें। हफ्ते में कम से कम तीन दिन दोस्तों से मिलने की योजनाएं बनाएं। किसी मनोरंजक गतिविधि में भाग लें और टी वी देखने की आदत को बदलें।

कैफीन ड्रिप

कैफीन आज हमारे आहार और पेय का एक बहुत ही महत्वपूर्ण भाग बन गया है। सबसे आम बात यह है कि हममें से बहुत से लोग इसके नुकसान पर ध्या न नहीं देते। लेकिन बहुत अधिक मात्रा में कैफीन लेने से हमारी चिंता बढ़ती है। वो लोग जो एक हफ्ते में प्रतिदिन 400 मिलीग्राम कैफीन लेते हैं उनमें 35 प्रतिशत तक इन्सु4लिन को ग्रहण करने की क्षमता कम हो जाती है और डायबिटीज़ का खतरा बढ़ जाता है।

ऐसी आदतों को छोड़ने के लिए आप कुछ दिनों तक आहार की डायरी बना सकते हैं और अपने आहार में कैफीन के सभी स्रोत जैसे सोडा, काफी,चाय और ताकत वाले पेय की मात्रा का अनुमान लगा सकते हैं। ऐसा करने के बाद प्रतिदिन 10 प्रतिशत तक कैफीन की मात्रा कम करें। यह ऐसे और भी आसान हो सकता है जैसे कि आधा लीटर कोला की जगह 300 एम एल  कोला लें अचानक से कैफीन की मात्रा कम करने से आपको तंद्रा आदि परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है लेकिन आप धीरे धीरे इस मात्रा को कम कर सकते हैं ।

धुन पर झूमना

खाली समय में या काम के साथ अपनी फेवरेट धुन बजाने पर खाली समय आसानी से कट जाता है और काम के समय ऐसा करने से तनाव का स्तार कम होता है। कई बार हम काम के साथ साथ अपने आई पाड की आवाज़ बढ़ाते जाते हैं और हमें इस बात का अंदाज़ा नहीं होता कि हम कितनी तेज़ आवाज़ में गाना सुन रहें हैं। हमारे कानों में प्रतिरक्षा प्रणाली नहीं होती इसलिए इनके अतिरिक्ता प्रभाव से हमारे इयरबड फट भी सकते हैं और आजीवन बहरापन भी हो सकता है। हमारे कानों को तबतक परेशानी नहीं होती जबतक कि आवाज़ 120 डेसीबेल से ज्यादा ना हो।

इस आदत से बचने के लिए आप गाने सुनें लेकिन कम आवाज़ में क्योंकि गाना सुनने का असली आनन्द भी हल्की आवाज़ में गाना सुनने से ही आता है। आइ पाड की आवाज़ इतनी होनी चाहिए कि आपको अपने आस पास की आवाजें सुनाई दें और लोगों को आपको बुलाने के लिए तेज़ आवाज़ का प्रयोग ना करना पडे़। अगर धीरे धीरे आप अपने आपको कम आवाज़ सुनने का आदि बना लेंगे तो सिर्फ हफ्ते भर बाद कम आवाज़ में भी संगीत का आनन्द उठा पायेंगे।


ड्राइविंग और मोबाइल का इस्तेमाल

यह जानते हुए कि ऐसी आदतें घातक हो सकती हैं ,हम ऐसी आदतें  अपनाते हैं। अगर आप पहली बार ऐसा करते हैं और आपको कुछ नहीं होता तो आपको लगता है कि आप दोबारा ऐसा कर सकते हैं और फिर यह आपकी आदत बन जाती है। ड्राइविंग करते समय मैसेज टाइप करना या फोन पर बातें करना हमारे लिए घातक हो सकता है। यहां तक कि हैडफोन का इस्तेकमाल करते हुए भी आपके काम करने की क्षमता 20 प्रतिशत तक कम हो सकती है।

ऐसी आदत छोड़ने की शायद हम ज़रूरत ना समझते हों लेकिन ऐसा करके आप किसी अनहोनी से बच सकते हैं। ड्राइविंग करते समय अपने फोन को साइलेंट कर दें। लेकिन बहुत से लोग फोन साइलेंट करने के बाद उसे रिंगर पर रखना भूल जाते हैं इसलिए ड्राइविंग करते समय फोन ना उठाने की आदत अपनायें।


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