Ayurveda
गुग्गुल------
गुग्गुल या 'गुग्गल' एक वृक्ष है। इससे प्राप्त राल जैसे पदार्थ को भी 'गुग्गल' कहा जाता है। इसमें मीठी महक रहती है। इसको अग्नि में डालने पर स्थान सुंगध से भर जाता है। इसलिये इसका धूप में उपयोग किया जाता है। यह कटु तिक्त तथा उष्ण है और कफ, बात, कास, कृमि, क्लेद, शोथ और अर्श नाशक है। गुग्गल एक छोटा पेड है जिसके पत्ते छोटे और एकान्तर सरल होते हैं। यह सिर्फ वर्षा ऋतु में ही वृद्धि करता है तथा इसी समय इस पर पत्ते दिखाई देते हैं। शेष समय यानि सर्दी तथा गर्मी के मौसम में इसकी वृद्धि अवरूद्ध हो जाती है तथा पर्णहीन हो जाता है। सामान्यत: गुग्गल का पेड 3-4 मीटर ऊंचा होता है। इसके तने से सफेद रंग का दूध निकलता है जो इसका का उपयोगी भाग है। प्राकृतिक रूप से गुग्गल भारत के कर्नाटक, राजस्थान, गुजरात तथा मघ्यप्रदेश राज्यों में उगता है। भारत में गुग्गल विलुप्तावस्था के कगार पर आ गया है, अत: बडे क्षेत्रों मे इसकी खेती करने की जरूरत है। हमारे देश में गुग्गल की मांग अधिक तथा उत्पादन कम होने के कारण अफगानिस्तान व पाकिस्तान से इसका आयात किया जाता है। गुग्गुल शुद्ध करने के लिए इसे त्रिफला के काढ़े और दूध में पका लें. गिलोय के काढ़े में गूग्गुल को मिलाकर छान कर और सुखाने से भी गुग्गुल शुद्ध हो जाता है. इसकी प्रकृति गर्म होती है . इसलिए गाय के दूध या घी के साथ सेवन करे,. इसे प्रयोग करते समय रात्री जागरण , दिन में सोना , खट्टा भोजन , अत्याधिक भोजन , धुप , मद्य , क्रोध आदि ना करें.इसका अधिक मात्रा में सेवन ना करें. गुग्गुल के बिभिन्न योग ---- कैशोर गूगल : वात रक्त और खून की खराबी के कारण शरीर में फोड़ा, फुंसी या चकत्ता होना, कुष्ठ, व्रण आदि व्याधियों में लाभकारी। मात्रा 1 से 2 गोली सुबह-शाम गर्म जल से। नवक गूगल : मेद वृद्धि (मोटापा) व आमवात नाशक। मात्रा 2-2 गोली सुबह-शाम। पुनर्नविद गूगल : वातरक्त, शोथ, गृध्रसी तथा प्रबल आमवात का नाश होता है। मात्रा 1 से 2 गोली सुबह-शाम गर्म जल से। महायोगराज गूगल : 80 प्रकार के वात रोगों में लाभकारी। समस्त वात विकार, संधिवान, अर्द्धगावात, कमर व मेरुदण्ड का दर्द, सर्वांग शूल, व्रण, भगंदर, अर्श वात रक्त आदि रोगों की प्रसिद्ध दवा। मात्र 1 से 2 रत्ती गोली सुबह-शाम रास्नादि क्वाथ, गर्म जल या चाय के साथ। योगराज गूगल : महायोगराज गूगल के समान गुण पर कुछ कम असर करने वाली। रास्नादि गूगल : आमवात, गठिया जोड़ों का दर्द आदि विकारों में लाभकारी। मात्रा 1 से 2 रत्ती सुबह-शाम। लाक्षादि गूगल : हड्डियों की बीमारी व सूजन, चोट लगने के बाद होने वाले दर्द, टूटी हड्डियों को जोड़ने एवं रक्त के जमाव को दूर करने में लाभकारी। मात्रा 1 से 2 गोली सुबह-शाम गर्म जल अथवा दूध से। सप्तविंशति गूगल : भगंदर, पुराने घाव, शूल आदि रोगों में लाभकारी। बवासीर, नाड़ी त्रण, आंत्र वृद्धि तथा वस्ति विकारों पर। मात्रा 1 से 2 गोली सुबह-शाम गर्म जल से। सिंहनाथ गूगल : वातरक्त, आमावत, संधिवात, गुल्म, शूल, उदर रोग, पथरी व कुष्ठ आदि में लाभदायक। अग्निदीपक है। मात्रा 1 से 2 गोली जल या रास्नादि काढ़े के साथ। सिंहनाथ गूगल : वातरक्त, आमवात, संधिवात, गुल्म शूल, उदर रोग, पथरी व कुष्ठ आदि में लाभदायक, अग्निदीपक है। मात्रा 1 से 2 गोली जल या रास्नादि काढ़े के साथ। त्रियोदांश गूगल : गृध्रसी आदि भयंकर वात रोगों में लाभकारी। मात्रा 1 से 2 गोली सुबह-शाम। त्रिफला गूगल : भगंदर, गुल्म सूजन और बवासीर आदि में अत्यंत लाभकारी। मात्रा 1 से 2 गोली सुबह-शाम। गुग्गुल का उपयोग ---- - 35 मिलीलीटर पानी में 3.50 मिलीग्रम गुग्गुल घोल लें फिर इस घोल में रुई भिंगोकर इसे दांत के गड्ढ़े रखें इससे कीड़े मरकर लार के साथ बाहर आ जाएंगे और दर्द से भी आराम मिलेगा। - 10 ग्राम गुग्गुल लेकर इसे 20 ग्राम गुड़ में मिलाकर पीसकर इसकी छोटी-छोटी गोलिया बना लें। सुबह-शाम कुछ दिनों तक 1-1 गोली घी के साथ लेने से घुटने का दर्द दूर हो जाता है। - चने का आटा और गुग्गुल बराबर मात्रा में लेकर पानी की सहायता से टिकिया बनाकर गर्म कर लें। यह टिकिया गर्म-गर्म ही ग्रंथि पर बांधने ग्रंथि शीघ्र ही बैठ जाती है। - दमा रोग में गुग्गुल लगभग आधा से 1 ग्राम मात्रा को सुबह-शाम दोनों समय घी के साथ सेवन करना लाभकारी होगा। - गुग्गुल की लगभग 0.12 ग्राम से 0.96 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम गुड़ के साथ सेवन करने से कई प्रकार के गर्भाशय के रोग ठीक हो जाते हैं। जब तक गर्भाशय से सम्बंधित रोग ठीक न हो जाए तब तक 4 से 6 घंटे के अन्तर पर इसका सेवन करते रहना चाहिए। - गुग्गुल के चूर्ण को नारियल के तेल या घी में घिसकर लेप बना लें और इसे घाव पर दिन में 3 बार लगाएं इससे घाव ठीक हो जाते हैं। - गुग्गुल का धुंआ कान में लेने से कान के सारे कीड़े मर जाते हैं। - 3 ग्राम शुद्ध गुग्गुल की गुठली निकालें और उसे 1 छुआरे में रख दें फिर इसके ऊपर गीले आटे का लेप कर दें। इसके बाद इसे गर्म राख में रख कर भून लें और इसे पीसकर चने के बराबर गोलियां बना लें और छाया में रखकर सुखा लें। इसमें से 1 गोली सुबह-शाम साफ साफ पानी के साथ लेने से कमर दर्द ठीक हो जाता है। - लगभग 240 मिलीग्राम से 960 मिलीग्राम कैशोर गुग्गुल के साथ रास्ना एवं घी सुबह और शाम को सेवन करने से लकवे में फायदा मिलता है। - सलई गुग्गुल गर्म पानी में घिसकर सुबह-शाम गिल्टी यानी ट्यूमर पर बांधने से फायदा मिलता है। 600 से 1200 मिलीग्राम गुग्गुल रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से रोग में इस रोग में लाभ होता है। - गुग्गुल की 240 मिलीग्राम से लेकर 960 मिलीग्राम तक गुड़ के साथ सेवन करने से आहार नली की जलन दूर हो जाती है। - लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में गुग्गल और त्रिफला के चूर्ण को मिलाकर रात में हल्का गर्म पानी के साथ सेवन करने से लम्बे समय से बनी हुई कब्ज की शिकायत दूर हो जाती है तथा शरीर में होने वाले सूजन भी दूर हो जाते हैं। - शुद्ध गुग्गुलु की 1 से 2 ग्राम को गर्म पानी के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से मोटापन दूर होता है। - गुग्गुल को गुड़ के साथ रोजाना दिन में 3 से 4 खुराक के रूप में सेवन करने से पेट में सूजन और जलोदर ठीक हो जाता है। - गुग्गुल को मुंह में रखने से या गर्म पानी में घोलकर दिन में 3 से 4 बार इससे कुल्ला व गरारे करने से मुंह के अन्दर के घाव, छाले व जलन ठीक हो जाते हैं। - कनखजूरे के काटने पर गुग्गुल को आग में जलाकर धूंनी देने से लाभ मिलता है। - गुग्गुल को सिरके में घोटकर सुबह-शाम नियमित रूप से सिर पर गंजेपन वाले स्थान पर लगाएं इससे लाभ मिलेगा। - 1 चम्मच गुग्गुल का चूर्ण 1 कप पानी में गलाकर 1 घंटे बाद छान लें। भोजन के बाद दोनों समय इस गुग्गुल का सेवन करने से अम्लपित्त (खट्टी डकार ) से छुटकारा मिल जाता है। - 240 मिलीग्राम से लेकर 960 मिलीग्राम गुग्गुल की मात्रा सुबह और शाम सेवन करने से आमाशय के जख्म में लाभ मिलता है। |
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